Monday, June 28, 2021

रूसो मम प्रियांबिका lyrics and mp3 - part of साईं धूप आरती

रूसो मम प्रियांबिका lyrics and mp3 - part of साईं धूप आरती

"रूसो मम प्रियांबिका" यह साईं की धूप आरती (evening aarti) का ही एक हिस्सा है। इसके lyrics मराठी भाषा में उपलब्ध हैं जो कि नीचे दिए गए हैं। यहाँ पर जो mp3 आप सुनेंगे वह मशहूर गायिका लता मंगेशकर जी की आवाज़ में है।

ruso mam priyambika lyrics


रूसो मम प्रियांबिका - श्रीगुरुप्रसाद याचना दशक


Play 👇 Sai baba Dhoop Aarti "श्रीगुरुप्रसाद - याचना - दशक" here.


रूसो मम प्रियांबिका, मजवरी पिताही रूसो। रूसो मम प्रियांगना, प्रियसुतात्मजाही रूसो।।
रूसो भगिनी बंधुही, श्वशुर सासुबाई रूसो। न दत्तगुरू साई मा, मजवरी कधीहीं रूसो ।।१।।

पुसो न सुनबाई त्या, मज न भ्रातृजाया पुसो। पुसो न प्रिय सोयरे, प्रिय सगे न ज्ञाती पुसो।।
पुसो सुहृद ना सखा, स्वजन नाप्तबंधू पुसो। परीन गुरू साई मा मजवरी,कधीहीं रूसो।।२।।

पुसो न अबला मुले, तरूण वृद्धही ना पुसो। पुसो न गुरूं धाकुटें, मजन थोर साने पुसो।।
पुसो नच भलेबुरे, सुजन साधुही ना पुसो। परी न गुरू साई मा, मजवरी कधीहीं रूसो।।३।।

रूसो चतुर तत्ववित्, विबुध प्राज्ञे ज्ञानी रूसो। रूसोहि विदुषी स्त्रिया, कुशल पंडिताही रूसो।।
रूसो महिपती यती, भजक तापसीही रूसो। न दत्तगुरू साई मा, मजवरी कधीही रूसो।।४।।

रूसो कवि ऋषी मुनी, अनघ सिद्ध योगी रूसो। रूसो हि गृहदेवता, नि कुलग्रामदेवी रूसो॥
रूसो खल पिशाच्चही, मलिन डाकिनींही रूसो। न दत्तगुरू साई मा, मजवरी कधीही रूसो।।५।।

रूसो मृगखग कृमी, अखिल जीवजंतु रूसो। रूसो विटप प्रस्तरा, अचल आपगाब्धी रूसो।
रूसो ख पवनाग्नि वार, अवनि पंचतत्वें रूसो। न दत्तगुरू साई मा, मजवरी कधीही रूसो।।६।।


रूसो विमल किन्नरा, अमल यक्षिणीही रूसो। रूसो शशि खगादिही, गगनिं तारकाही रूसो।।
रूसो अमरराजही, अदये धर्मराजा रूसो। न दत्तगुरू साई मा, मजवरी कधीही रूसो।।७।।

रूसो मन सरस्वती, चपलचित्त तेंही रूसो। रूसो वपु दिशाखिला, कठिण काल तोही रूसो।
रूसो सकल विश्वही, मयि तु ब्रह्मगोलं रूसो। न दत्तगुरू साई मा, मजवरी कधीही रूसो।।८।।

विमूढ म्हणूनी हसो, मज न मत्सराही डसो। पदाभिरूचि उल्हासो, जननकर्दमीं ना फसो।
न दुर्ग धृतिचा धसो, अशिवभाव मागें खसो। प्रपंचि मन हें रूसो, दृढ विरक्ति चित्तीं ठसो॥९॥

कुणाचिही घृणा नसो, न च स्पृहा कशाची असो। सदैव हृदयीं वसो, मनसि ध्यानिं साई वसो।
पदी प्रणय वोरसो, निखिल दृश्य बाबा दिसो। न दत्तगुरू साई मा, उपरि याचनेला रूसो॥१०॥

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